मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल भेजने को लेकर डराया

फरीदाबाद (शुची आर्या): मुंबई पुलिस और ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंककर्मी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर ₹60 लाख रूपये ठग लिए। साइबर फ्रॉड ने बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर जेल भेजने की भी धमकी दी। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाना में केस दर्ज कराया।

सेक्टर 9 निवासी पीड़ित 87 वर्षीय बुजुर्ग हैं जो सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई ब्रांच में मैनेजर के तौर पर कार्यरत थे। रिटायर होने के बाद करीब 27 वर्ष पहले वे यहां पर रहने के लिए आए थे। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उनके पास दो मोबाइल नंबर हैं जिनमें से एक नागल कॉलोनी अंधेरी मुंबई के पते पर था। लेकिन उपयोग में न होने के कारण अब वह नंबर किसी और को मिल चुका है। उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर को उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया और कहा कि वह ट्राई का अधिकारी है। उसने बुजुर्ग को मुंबई पुलिस के सब इंस्पेक्टर राहुल से बात करने को कहा। इसके बाद आकांक्षा अग्रवाल नाम की महिला से बात करवाई।

मनी लॉन्ड्रिंग में जेल भेजने की दी धमकी
पीड़ित ने पोलिस को कहा कि आकांक्षा अग्रवाल ने उन्हें फोन कर कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग (अघोषित कला धन का उपयोग) मामले में आपका नाम सामने आया है, जिस कारण आपको जेल जाना पड़ेगा। इतना ही नहीं, दोनों फर्जी अधिकारियों ने पीड़ित की सारी संपत्ति जप्त करने की धमकी भी दी। ठगों ने जांच करने के नाम पर पीड़ित की एफडी और बचत खाते की सारी जानकारी हासिल कर ली। ठगों ने पीड़ित से जांच पूरी होने तक किसी से भी बाद या संपर्क न करने का दबाव बनाया।

कई खातों में पैसे कराए ट्रांसफर
पीड़ित ने कहा कि उन्होंने डर के कारण किसी को भी इस बारे में नहीं बताया। पीड़ित ने बताया कि साइबर ठगों ने 5 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनके सेविंग अकाउंट और एफडी से आरटीजीएस के माध्यम से करीब 60 लाख रुपये अलग-अलग बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने उन्हें भरोसा दिया था की जांच के बाद उनकी पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि पैसा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक – वराछा शाखा, इंडसइंड बैंक खाता – शाखा करुणागप्पल्ली कॉर्पोरेट में ट्रासफर करवाए थे। पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने कहा कि पीड़ित बुजुर्ग की शिकायत पर साइवर थाना बल्लभगढ़ ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अभी ठगों का सुराग नहीं लगा है।

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