फरीदाबाद (काजल मोदी): सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2025 में ओडिशा और मध्य प्रदेश को थीम राज्य के रूप में चुना गया है। यह मेला 7 फरवरी से 23 फरवरी तक आयोजित होगा। 38 सालों में पहली बार ऐसा हुए है कि दो राज्यों की थीम एक साथ लगाई जाएंगी। जिस कारण दो अलग – अलग राज्यों की संस्कृति लोगों को देखने मिलेगी। ओडिशा को दूसरी बार और मध्य प्रदेश को तीसरी बार मेले की थीम घोषित किया गया है।
इस वर्ष, बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देश – बिम्सटेक समूह के सदस्य – मेले के लिए सांस्कृतिक साझेदार के रूप में काम करेंगे, साथ ही नॉर्थ ईस्ट हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन भी मेले के लिए सांस्कृतिक साझेदार के रूप में काम करेंगे।

फरीदाबाद के अरावली की पहाड़ीयों में सूरजकुंड झील के पास पिछले 38 सालों से सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेले का आयोजन हो रहा है। सूरजकुंड मेला भारत की हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित करने के लिए प्रसिद्ध है। पहली बार 1987 में यह मेला लगाया गया था, कोरोना के कारण 2021 में यह मेला नहीं लगा था।
इस बार यह 38वां मेला आयोजित किया जाएगा। जिस थीम स्टेट को चुना जाता है मेला परिसर को उसी स्टेट की संस्कृति के साथ सजाया जाता है। हर साल केवल एक ही राज्य को थीम के लिए चुना जाता था, लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि दो राज्यों को थीम स्टेट चुना गया है। हालांकि शुरुआती दौर में मेले की थीम नहीं चुनी जाती थी । सन् 1989 से हर साल अलग अलग राज्यों की थीम चुनी जा रही है।

इस वर्ष ओडिशा की विशेष भागीदारी इसे और आकर्षक बनाएगी। ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए मेले में पुरी के जगन्नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, लिंगराज मंदिर और ब्रह्मेश्वर मंदिर की प्रतिकृतियाँ स्थापित की जाएंगी। मुख्य चौपाल पर ओडिशा के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें स्थानीय कला और संगीत का प्रदर्शन किया जाएगा। ओडिशा को इससे पहले 1993 में थीम बनाया गया था। वहीं मध्य प्रदेश तीसरी बार थीम स्टेट बना। इससे पहले 1992 और 2009 में इसकी थीम लगी थीं।

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