डिजिटल अरेस्ट कर 2.13 करोड़ ठगी, खाताधारक गिरफ्तार
फरीदाबाद, 31 जुलाई (न्यूज अ़़ड्डा ) – साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2,13,16,000 रुपये की साइबर ठगी के एक मामले में खाताधारक को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान ऐश्वर्य वर्धन (23 वर्ष), निवासी भांकरोटा, जयपुर (राजस्थान) के रूप में हुई है। अदालत में पेश करने के बाद आरोपी को 6 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। पुलिस रिमांड के दौरान मामले में शामिल अन्य आरोपियों, बैंक खातों तथा ठगी की रकम के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है।
जनवरी 2026 में सेक्टर-64C निवासी एक व्यक्ति के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.13 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। मामले की गंभीरता के मद्देनजर थाना साइबर बल्लभगढ़ में 9 फरवरी 2026 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। साइबर थाना की टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की पड़ताल तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी ऐश्वर्य वर्धन को जयपुर से गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते में ठगी की 5,10,000 रुपये की राशि प्राप्त हुई थी। जिसने अपना बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। वह जयपुर स्थित एक निजी कंपनी में काम करता है। शिकायत प्राप्त होने के तुरंत बाद साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने बैंक खातों का विस्तृत विश्लेषण किया और बैंकों से समन्वय स्थापित करते हुए 1 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि संबंधित खातों में तत्काल फ्रीज करवा दिये और फिर आगे की कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने यह राशि शिकायतकर्ता के खाता में ट्रांसफर करवा दी है। फरीदाबाद पुलिस की तत्परता और त्वरित कार्रवाई के कारण शिकायतकर्ता को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका।
बता दें कि कि 13 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता की पत्नी के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक बैंक खाते में 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। इसके बाद कॉल को कथित रूप से मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दिया गया।
इसके बाद ठगों ने पति-पत्नी को लगातार वीडियो कॉल पर रखा और उन्हें घर से बाहर जाने से मना किया। हर दो घंटे में वीडियो कॉल के माध्यम से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई ताकि वे किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क न कर सकें। ठगों ने स्वयं को विभिन्न सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित परिवार पर मानसिक दबाव बनाया और गिरफ्तारी का भय पैदा किया।
15 जनवरी को पीड़ित को Directorate of Enforcement (ED) के नाम से फर्जी “Freezing Funds Control Order” तथा “Arrest Order” भेजे गए। अगले दिन 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के नाम से एक और फर्जी पत्र भेजा गया, जिसमें कथित सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देते हुए निर्देश दिए गए कि उनके सभी बैंक खातों की राशि जांच के लिए बताए गए खातों में स्थानांतरित कर दी जाए। साथ ही 48 से 72 घंटे के भीतर पूरी राशि वापस लौटाने का झूठा आश्वासन दिया गया।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के भय से पीड़ित ने जनवरी 2026 के दौरान विभिन्न बैंक ट्रांजेक्शनों के माध्यम से कुल 2,13,16,000 रुपये साइबर ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।
राशि प्राप्त करने के बाद ठगों ने पीड़ित को सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी NOC एवं PCC पत्र भी भेजे, जिनमें उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से बरी किए जाने का दावा किया गया। जब पीड़ित ने अपनी जमा राशि वापस लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया तो ठगों के मोबाइल नंबर बंद मिले और उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, सुप्रीम कोर्ट अथवा अन्य न्यायालय किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करते और न ही जांच के नाम पर किसी बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं। “डिजिटल अरेस्ट” का भारतीय कानून में कोई भी प्रावधान नहीं है।
यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की कॉल, वीडियो कॉल, व्हाट्सएप संदेश, फर्जी नोटिस या गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे मांगने का प्रयास किया जाए तो तुरंत कॉल काट दें, किसी भी प्रकार की राशि ट्रांसफर न करें और तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही निकटतम साइबर थाना या पुलिस स्टेशन में भी तुरंत सूचना दें।
