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फरीदाबाद, 2 अक्टूबर ( न्यूज अड्डा / पूजा भारद्वाज ) : घुटनों में दर्द एक आम समस्या है इस समस्या का उम्र से कोई संबंध नही होता हैं यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह समस्या कभी-कभी सामान्य थकान या चोट के कारण होती है, तो कभी किसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति का संकेत देती है।

घुटनों में दर्द के प्रमुख कारण

  • गठिया (Arthritis): ओस्टियोआर्थराइटिस (उम्र या घिसाव के कारण) और र्यूमेथॉइड गठिया (सूजन संबंधी गठिया) इसके सबसे बड़े कारणों में से हैं।
  • चोट या आघात (Injury): खेलकूद, गिरने या दुर्घटना के कारण लिगामेंट (जैसे ACL) में खिंचाव, मेनिस्कस फटना या टेंडन डैमेज होना।
  • बर्सिटिस (Bursitis): घुटने के जोड़ों को कुशन देने वाले छोटे तरल पदार्थ से भरे थैलों (Bursae) में अत्यधिक दबाव या संक्रमण के कारण सूजन होना।
  • टेंडिनाइटिस (Tendinitis): घुटने की मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले टेंडन में सूजन या जलन।
  • यूरिक एसिड का बढ़ना (Gout): जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा होने से अचानक तेज दर्द और सूजन होना।
  • वजन का अधिक होना (Obesity): शरीर का अतिरिक्त भार घुटनों के जोड़ों पर अत्यधिक दबाव डालता है, जिससे कार्टिलाज तेजी से घिसता है।

मुख्य लक्षण

  • घुटने में तेज या सुन्न दर्द (चलते, बैठते या सीढ़ियां चढ़ते समय बढ़ना)।
  • घुटने के आसपास सूजन, लालिमा और छूने पर गर्माहट महसूस होना।
  • घुटना मोड़ने या सीधा करने में जकड़न (Stiffness) महसूस होना।
  • घुटने से कट-कट या चटकने की आवाज आना।
  • जोड़ों की कमजोरी के कारण खड़े होने या वजन उठाने में असमर्थता।

घुटने के दर्द को ठीक करने और राहत पाने के उपाय

1. घरेलू और प्राकृतिक उपाय

  • आराम और आइस पैक (R.I.C.E विधि): घुटने को आराम दें। सूजन और तेज दर्द होने पर दिन में 3-4 बार 15-20 मिनट के लिए बर्फ की सिंकाई करें।
  • हल्दी और अदरक का सेवन: हल्दी में मौजूद ‘कुरकुमिन’ में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण होते हैं। गुनगुने दूध में हल्दी डालकर पीना फायदेमंद है।
  • तेल की मालिश: हल्के गुनगुने सरसों, तिल या महानारायण तेल से घुटने की हल्के हाथों से मालिश करने से रक्त संचार (Blood Circulation) बेहतर होता है।
  • वजन नियंत्रण: यदि आपका वजन अधिक है, तो संतुलित आहार और हल्की गतिविधि से वजन कम करें ताकि घुटनों पर दबाव घटे।

2. व्यायाम और योग (शारीरिक सक्रियता)

  • स्ट्रेट लेग रेजेज (Straight Leg Raises): पीठ के बल लेटकर एक पैर को सीधा ऊपर उठाएं, कुछ सेकंड रोकें और नीचे लाएं। इससे घुटने के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • हल्की वॉक (Walking): समतल जमीन पर रोजाना हल्की सैर करें, लेकिन घुटनों पर ज्यादा जोर देने वाले व्यायाम या दौड़ने से बचें।
  • योग: वज्रासन (यदि संभव हो), सुखासन और हल्के स्ट्रेचिंग अभ्यास डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से करें।

3. चिकित्सीय उपाय (Medical Treatment)

  • दर्द निवारक दवाएं: डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर का नियमित सेवन न करें। सूजन कम करने के लिए डॉक्टर एनएसएआईडी (NSAIDs) या जेल लिख सकते हैं।
  • फिजिकल थेरेपी (Physiotherapy): फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए विशेष व्यायाम जोड़ को स्थिर रखने और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
  • गंभीर मामलों में इलाज: यदि लिगामेंट पूरी तरह फट गया है या गठिया बहुत बढ़ चुका है, तो डॉक्टर ऑर्थोस्कोपिक सर्जरी या नी रिप्लेसमेंट (घुटने का प्रत्यारोपण) की सलाह दे सकते हैं।

सावधानी: यदि दर्द लगातार बना हुआ है, घुटना मुड़ नहीं रहा है, सूजन कम नहीं हो रही है या चलने में असमर्थता है, तो तुरंत किसी आर्थोपेडिक (हड्डियों के डॉक्टर) से परामर्श करें।

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